आधार से लिंक होगा वोटर आईडी! चुनाव आयोग ने बुलाई अहम बैठक

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार, 18 मार्च 2025 को केंद्रीय गृह सचिव, विधायी विभाग के सचिव और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में मतदाता सूची को आधार से जोड़ने के लिए उठाए जाने वाले कदमों और इससे संबंधित चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।मतदाता सूची को शुद्ध करने की पहलइस बैठक का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी और डुप्लिकेट नाम हटाना और इसे अधिक सटीक बनाना है। चुनाव आयोग लंबे समय से इस मुद्दे पर काम कर रहा है और 2021 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन के बाद, स्वैच्छिक आधार पर मतदाताओं से आधार नंबर एकत्र करना शुरू किया गया था। हालांकि, कानूनी और गोपनीयता संबंधी चिंताओं के कारण इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया।अब आयोग फिर से आधार को वोटर आईडी से लिंक करने पर विचार कर रहा है ताकि फर्जी मतदान को रोका जा सके और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सके।एक ही EPIC नंबर की समस्याहाल ही में पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में एक ही EPIC नंबर वाले मतदाताओं का मामला सामने आया है। यह गलती उस समय हुई जब कुछ राज्यों में गलत अल्फान्यूमेरिक सीरीज के कारण एक ही नंबर दोबारा जारी कर दिया गया। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने अगले तीन महीनों में डुप्लीकेट वोटर एंट्री हटाने की योजना बनाई है।

फर्जी मतदान पर लगेगी रोक?

आधार और वोटर आईडी लिंकिंग से कई समस्याओं का समाधान हो सकता है:

✅ फर्जी मतदाताओं की पहचान होगी और उन्हें हटाया जा सकेगा।

✅ डुप्लिकेट मतदाता सूची को सही किया जा सकेगा।

✅ चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होगी।

हालांकि, इस कदम पर गोपनीयता से जुड़ी चिंताएं भी उठाई जा रही हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना इसे लागू करना खतरनाक हो सकता है।आगे क्या होगा?चुनाव आयोग की इस बैठक के बाद आगे की दिशा तय होगी। अगर आधार और वोटर आईडी को अनिवार्य रूप से लिंक करने का फैसला लिया जाता है, तो इसके लिए नई नीतियां बनाई जा सकती हैं।इस फैसले पर जनता की क्या राय है? हमें कमेंट में बताएं!