न्यूरिया राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों का संकट: 22 पदों पर सिर्फ 4 शिक्षक, छात्रों का भविष्य दांव पर।

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न्यूरिया-पीलीभीत 1मार्च 2025-शिक्षा के बिना समाज की प्रगति संभव नहीं, लेकिन जब शिक्षा देने वाले शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर पर न्यूरिया का एकमात्र राजकीय इंटर कॉलेज जिसकी बुनियाद 1960 मे रखी गई थी 1975 मे हाई स्कूल और 1996 मे इंटर की मान्यता के बाबजूद इस समय शिक्षकीय संकट से गुजर रहा है।कालेज मे 22 स्वीकृत पदों के मुकाबले मात्र 4 शिक्षक ही कार्यरत हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर छात्रों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।

प्रधानाचार्य नहीं, विषय-विशेषज्ञ शिक्षक भी नदारद विद्यालय में स्थायी प्रधानाचार्य नहीं हैं, जिससे प्रबंधन और प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक न होने के कारण छात्रों को सही शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

विद्यालय में केवल चार शिक्षक कार्यरत हैं– बिना विज्ञान-गणित-अंग्रेजी शिक्षक के चल रहा विद्यालय।बिद्यालय मे प्रधानाध्यापक समेत मात्र 4 ही शिक्षक है इनमें से एक शिक्षक 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

एक हजार से घटकर 224 छात्र ही बचे-कभी इस विद्यालय में एक हजार से अधिक छात्र पढ़ते थे। लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण छात्र संख्या लगातार घटती जा रही है।वर्तमान में केवल 224 छात्र ही नामांकित हैं, जिनमें हाई स्कूल के 32 और इंटर के 30 छात्र शामिल हैं।

गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों पर सबसे बुरा असर-यह विद्यालय उन छात्रों की शिक्षा का एकमात्र सहारा था, जिनके परिवार महंगे निजी स्कूलों की फीस नहीं उठा सकते। लेकिन जब सरकारी विद्यालय में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है, तो उनके पास स्कूल छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण कई छात्र मजबूरी में पढ़ाई बीच में ही छोड़ रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है।

पूर्व छात्रों और स्थानीय लोगों की चिंता-इस विद्यालय से पढ़े कई छात्र आज उच्च पदों पर कार्यरत हैं। जब उन्हें अपने विद्यालय की यह दुर्दशा देखने को मिली, तो उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की।

विद्यालय के एक पूर्व छात्र मो रफी , जो अब बिजली बिभाग मे अधिशासी अभियंता के पद कार्यरत है , ने कहा—”हमने यहीं से शिक्षा प्राप्त की और आगे बढ़े, लेकिन अब हालत इतनी खराब हो गई है कि अगली पीढ़ी को अच्छी शिक्षा मिल ही नहीं पाएगी।