40 बार रिजेक्शन, क्रिकेट छोड़ा, नौकरी की… फिर सात साल बाद मैदान पर लौटे वरुण चक्रवर्ती!

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नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेटर वरुण चक्रवर्ती की कहानी संघर्ष और जुनून की मिसाल है। एक समय ऐसा था जब उन्होंने 40 से ज्यादा बार सेलेक्शन ट्रायल दिए, लेकिन हर बार रिजेक्ट हुए। कई बार क्रिकेट में असफलता के बाद उन्होंने विकेटकीपर और बल्लेबाज बनने की भी कोशिश की, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। आखिरकार, क्रिकेट को अलविदा कहकर उन्होंने आर्किटेक्चर की पढ़ाई की और नौकरी करने लगे।लेकिन सपनों से दूर रहना आसान नहीं होता। तीन साल नौकरी करने के बाद वरुण को एहसास हुआ कि उनकी असली जगह क्रिकेट का मैदान है। उन्होंने अपने पिता से आखिरी मौका मांगा और स्पिन गेंदबाजी को अपना हथियार बनाया।

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में रचा इतिहास

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के मुकाबले में जब ट्रैविस हेड भारतीय गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा रहे थे, तब कप्तान रोहित शर्मा ने वरुण चक्रवर्ती को गेंद थमाई। दूसरी ही गेंद पर वरुण ने ट्रैविस हेड को क्लीन बोल्ड कर मैच का रुख बदल दिया। यह वही खिलाड़ी था, जो कभी क्रिकेट छोड़कर नौकरी कर रहा था, लेकिन आज उसने भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

वरुण चक्रवर्ती – हार नहीं मानी और इतिहास रच दिया

वरुण की यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बार-बार असफलताओं से हार मानने लगता है। उन्होंने साबित किया कि सपनों का पीछा करने वालों को कोई रोक नहीं सकता। अगर जुनून और मेहनत हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता सफलता तक पहुंचा सकता है।