नई दिल्ली: वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। जहां सरकार इसे पारदर्शिता और बेहतर प्रशासन का कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल और मुस्लिम संगठन इसे समुदाय के अधिकारों पर हमला मान रहे हैं। इस बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भाजपा सरकार पर सीधा निशाना साधा है।क्या नीतीश, नायडू और जयंत करेंगे विरोध?सूत्रों के मुताबिक, जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) अध्यक्ष जयंत चौधरी इस विधेयक के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नेता मुस्लिम समुदाय के हितों को साधने के लिए इस मुद्दे पर सरकार से अलग रुख अपना सकते हैं।
ओवैसी का दांव और बीजेपी की मुश्किलें
असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे वक्फ संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाने की साजिश बताया है। ओवैसी ने कहा,”यह विधेयक मुसलमानों की संपत्तियों को कमजोर करने की कोशिश है। अगर यह कानून बना, तो वक्फ बोर्ड की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी।”ओवैसी के इस रुख से भाजपा की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि इससे मुस्लिम समुदाय के बीच असंतोष पैदा हो सकता है, जिसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस की ‘बी टीम’ का आरोप
भाजपा नेताओं ने इस मामले में ओवैसी को घेरते हुए कहा कि वह कांग्रेस की ‘बी टीम’ बनकर काम कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा,”ओवैसी का विरोध दिखावटी है। उनका मकसद कांग्रेस को फायदा पहुंचाना और मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करना है।”आगे क्या?वक्फ बिल पर संसद में चर्चा के दौरान विपक्षी दलों की रणनीति अहम होगी। अगर नीतीश कुमार, नायडू और जयंत चौधरी खुलकर इसका विरोध करते हैं, तो यह मोदी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। वहीं, ओवैसी का विरोध भाजपा के लिए मुस्लिम वोटों के समीकरण को प्रभावित कर सकता है।आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी माहौल और गरमाने की संभावना है।