मुंबई। पुरुष प्रधान क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाकर मिसाल पेश करने वाली मुमताज़ काज़ी आज लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। भारतीय रेलवे में सेवा दे रही मुमताज़ काज़ी एशिया की पहली महिला लोको मोटिव ड्राइवर हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत और जुनून से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।मुमताज़ काज़ी ने 1991 में महज 20 साल की उम्र में ट्रेन चलाने का सफर शुरू किया था। उस दौर में रेल इंजन चलाने को केवल पुरुषों का कार्य समझा जाता था, लेकिन उन्होंने इस धारणा को तोड़ते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को देखते हुए 1995 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने उन्हें एशिया की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर के रूप में मान्यता दी।इसके बाद भी उन्होंने अपनी सफलता की राह जारी रखी और 2005 में सेकंड मोटरवुमन बनने का गौरव हासिल किया। उनके संघर्ष और समर्पण ने यह साबित कर दिया कि अगर लगन सच्ची हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।मुमताज़ काज़ी का सफर सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने समाज में महिलाओं की भागीदारी को एक नई दिशा दी है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि महिलाओं को भी अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अधिकार है। उनकी सफलता उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं।