बिहार में सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारी सीखेंगे उर्दू, नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

0
51

पटना, 14 मार्च 2025। बिहार सरकार ने राज्य में उर्दू भाषा को बढ़ावा देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए उर्दू सीखना अनिवार्य करने की योजना बनाई है। इससे प्रशासनिक कामकाज में उर्दू भाषा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और उर्दूभाषी जनता को सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

सरकारी कार्यालयों में बढ़ेगा उर्दू का उपयोग

बिहार सरकार के इस फैसले के तहत राज्य के सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और अन्य संगठनों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए उर्दू भाषा के प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके लिए बिहार उर्दू अकादमी और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की मदद ली जाएगी।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “बिहार में बड़ी संख्या में उर्दू भाषी लोग हैं। सरकारी योजनाओं और सेवाओं को सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।”

गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए भी अवसर

सरकारी कर्मचारियों के अलावा, निजी क्षेत्र के कर्मचारी भी इस प्रशिक्षण में भाग ले सकेंगे। खासकर बैंकिंग, शिक्षा और मीडिया जैसे क्षेत्रों में काम करने वालों को इससे लाभ मिलेगा।

भाजपा ने उठाए सवाल, सरकार ने किया बचाव

इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी दल भाजपा ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे “अन्य भाषाओं के साथ भेदभाव” करार दिया। वहीं, राजद और जदयू नेताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे “सांस्कृतिक समावेश” की दिशा में बड़ा कदम बताया।

बिहार सरकार का पक्ष

शिक्षा विभाग के अनुसार, उर्दू सीखने से न केवल प्रशासनिक कामकाज में सुधार होगा, बल्कि सांस्कृतिक विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह फैसला राज्य की समग्र विकास नीति का हिस्सा है और इससे जनता और प्रशासन के बीच संवाद बेहतर होगा।

(