नई दिल्ली। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा जगत में इतिहास रच दिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के 17 वर्षीय किशोर, जो जन्म से ही पेट पर दो अतिरिक्त पैरों के साथ जी रहा था, की AIIMS में सर्जरी कर उसे इस असामान्य स्थिति से मुक्त कर दिया गया।
क्या था मामला? इस किशोर को ‘इनकंप्लीट पैरासाइटिक ट्विन’ नामक दुर्लभ जन्मजात स्थिति थी। यह तब होता है जब गर्भ में जुड़वां भ्रूणों में से एक का पूरा विकास नहीं हो पाता और वह दूसरे भ्रूण से जुड़ा रह जाता है। परिणामस्वरूप, इस लड़के के पेट से दो अनावश्यक पैर लटक रहे थे। इस स्थिति के कारण न केवल उसे शारीरिक असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा था, बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी वह काफी परेशान था।
कैसे हुई सर्जरी? जनवरी 2025 में, जब परिजनों को AIIMS दिल्ली में इस दुर्लभ स्थिति के इलाज की संभावना के बारे में पता चला, तो उन्होंने डॉक्टरों से संपर्क किया। जांच के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी करने का निर्णय लिया।8 फरवरी 2025 को, सर्जरी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. असुरी कृष्णा के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम ने ढाई घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस टीम में सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट शामिल थे।मरीज को मिली नई जिंदगीसर्जरी के बाद किशोर तेजी से स्वस्थ हुआ और चार दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जीने में सक्षम है।
डॉक्टरों ने क्या कहा?डॉ. असुरी कृष्णा ने बताया,”यह एक दुर्लभ मामला था और इसे सफलतापूर्वक पूरा करना हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। दुनियाभर में अब तक ऐसे केवल 40 ही मामले दर्ज किए गए हैं। इस सर्जरी से मरीज को नई जिंदगी मिली है।”चिकित्सा जगत में मिसालAIIMS दिल्ली की यह सफलता चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न केवल दुर्लभ शारीरिक विकृतियों के इलाज की नई संभावनाएं खुली हैं, बल्कि उन मरीजों को भी उम्मीद मिली है जो ऐसी ही किसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं।